जब गम आये तो वो भी कभी खा लेना दवाई समझ कर .

किसीने खुब सही कहा है ....
खुशीयॉ आये जिंदगी मै तो
      चख लेना मिठाई समझ कर ....
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जब गम आये तो वो भी
    कभी खा लेना दवाई समझ कर ....

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आँसुओं से जिनकी आँखें नम नहीं, 
क्या समझते हो कि उन्हें कोई गम नहीं? 
तड़प कर रो दिए गर तुम तो क्या हुआ, 
गम छुपा कर हँसने वाले भी कम नहीं।


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  अभी कुछ दूरियां तो कुछ फांसले बाकी हैं,
पल-पल सिमटती शाम से कुछ रौशनी बाकी है,
हमें यकीन है कि कुछ ढूंढ़ता हुआ वो आयेगा ज़रूर
अभी वो हौंसले और वो उम्मीदें बाकी हैं।


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कदम कदम पे बहारों ने साथ छोड़ दिया,
पड़ा जब वक़्त तब अपनों ने साथ छोड़ दिया,
खायी थी कसम इन सितारों ने साथ देने की
सुबह होते देखा तो इन सितारों ने साथ छोड़ दिया।


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ऐ खुदा बुला ले अब तो अपने पास मुझे,
क्यों मुझसे तू और इम्तेहान लिए जाता है,
अब किसी को जरुरत नहीं है जहाँ में मेरी
ये इंसान यहाँ पर बेमतलब जिए जाता है.


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जीवन का हर पन्ना तो रंगीन नही होता,
हर रोने वाला तो गमगीन नही होता,
एक ही दिल को कोई कब तक तोड़ता रहेगा
अब कोई जोड़ता भी है तो यकीन नही होता।
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एक शख्स पास रह के समझा नहीं मुझे,
इस बात का मलाल है शिकवा नहीं मुझे,
मैं उस को बेवफाई का इलज़ाम कैसे दू
उसने तो दिल से ही चाहा नहीं मुझे !


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खामोश बैठें तो लोग कहते हैं
उदासी अच्छी नहीं,
ज़रा सा हँस लें तो
मुस्कुराने की वजह पूछ लेते हैं !


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अनजाने में यूँ ही हम दिल गँवा बैठे,
इस प्यार में कैसे धोखा खा बैठे,
उनसे क्या गिला करें.. भूल तो हमारी थी
जो बिना दिलवालों से ही दिल लगा बैठे।


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ना तो जी पाती हु और ना ही मौत आती
ए-ज़िन्दगी क्यों मुझे है इतना आज़माती
जलती हर शाम और सुबह भुझती हुयी है मेरी
इस जिस्म में अब रूह को बड़ी घुटन सी होती
ना तो कोई तमंन्ना मेरी ना ही कोई आरज़ू रही
अब दिखावे की हँसी मुझसे हँसी नहीं जाती
आ मौत बनके मेरे मेहबूब, तू ही लगा गले….
के बस अब और ज़िन्दगी मुझसे संभाली नहीं जाती


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इश्क़-ए-महफ़िल में हम भी एक साज़ सुनाने आये हैं,
आज उनकी यादों को दिल की दीवारों से मिटाने आये हैं,
खेलकर चले गए मेरे दिल की वफाओ से खिलौना समझकर
इसीलिए बेवफा उन्हें हम आज सरे आम कहने आये हैं..!!


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मेरी आँखों से बहते अश्क भी अब सूखने लगे हैं,
क्या बताये तुम्हे की किस कदर हम टूटने लगे हैं,
जिंदगी में जो वजह थी मेरे मुस्कुराने की,
आज वही वजह बनी हैं मेरे टूटकर बिखर जाने की